गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर केस में पत्नी राजकंवर ने वकील के जरिये चूरू के जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर की है। राजकंवर ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन करने की मांग की है। राजकंवर ने एनकाउंटर में शामिल अधिकारियों के प्रमोशन पर सवाल उठाए है। साथ ही पुलिस अधिकारियों को दिए गए लाभ को रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई कोर्ट पहले ही इस एनकाउंटर को फर्जी करार दे चुकी है। इसके बाद भी इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों को आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन और पुरस्कार दिए गए। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर 2014 के आदेशों के प्रतिकूल है। जिसमें साफ निर्देश हैं कि किसी भी एनकाउंटर के तुरंत बाद गैलेंट्री अवॉर्ड या अन्य लाभ तब तक नहीं दिए जा सकते। जब तक बहादुरी संदेह से परे साबित न हो जाए। सभी लाभों को तुरंत रद्द करने की मांग
राजकंवर ने याचिका के जरिए अदालत से आग्रह किया है कि इन सभी लाभों को तुरंत रद्द किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्यवाही शुरू की जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कानून का राज कायम रहे और जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। न्यायिक आदेशों की अनदेखी न केवल कानून के शासन को कमजोर करती है। बल्कि यह जनता के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाती है। मालासर गांव में हुआ था एनकाउंटर
गौरतलब है कि आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर 24 जून 2017 को चूरू जिले के मालासर गांव में राजस्थान पुलिस की एसओजी और अन्य टीमों ने किया था। पुलिस ने दावा किया था कि वह फरार चल रहे गैंगस्टर और कई मामलों में वांछित था, जबकि परिवार और समर्थकों ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया था। उस समय मामले ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी। इसमें कई जगह विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। राजकंवर ने कोर्ट में पेश किया प्रार्थना पत्र
एडवोकेट नरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि स्व. आनंदपाल की पत्नी की ओर से सेशन कोर्ट चूरू में प्रार्थना पत्र पेश किया गया है। जिसमें ये मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश हैं उनकी अच्छे से पालना की जाए। ये प्रार्थना पत्र हमने कल पेश किया था। कल किसी कारणवश और ये प्रार्थना पत्र न्यायालय द्वारा नहीं लिया गया, लेकिन आज जो सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है, वो दिखाने के बाद कोर्ट ने यह प्रार्थना पत्र ले लिया है और उसमें कार्रवाई करने के कोर्ट ने 25 अगस्त की तारीख दी है। 25 अगस्त को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। तब तक कोर्ट अपनी कार्रवाई करेगा। कोर्ट ने एनकाउंटर को माना फर्जी
एडवोकेट नरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि जो आनंदपाल एनकाउंटर था, उसको कोर्ट ने फर्जी माना है। उस एनकाउंटर जो भी पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और आईपीएस थे, उन को 302 हत्या के प्रकरण में दोषी माना है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना नहीं की गई। राजस्थान सरकार और पुलिस विभाग की ओर से एनकाउंटर के दोषियों को प्रमोशन दिए गए हैं और उनकी ओर से जो आर्थिक लाभ लिए गए हैं वो नहीं दिए जाने थे। अब हमें पता चला है कि वो लाभ दे दिए गए हैं। उसके खिलाफ हम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आए हैं। वो जो भी लाभ थे वो वापस लिए जाएं। जो लोग दोषी है, कोर्ट ने भी उनके खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है।
