एक मां नौ महीने तक अपने खून से बच्चे को आकार देती है, एक रूप देती है। उस मां का दूध शिशु के लिए सबसे शुद्ध, पोषक और रोग प्रतिरोधक शक्ति से भरपूर होता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली और प्रदूषण के चलते मां के दूध के जरिए ही कई बीमारियां शिशुओं को अपना शिकार बना रही हैं। यह तथ्य दैनिक भास्कर और डॉ. ममता शर्मा के साथ की गई रिसर्च व शोध में सामने आया है। भास्कर ने राजस्थान की 26 से 42 वर्ष आयु की 105 मांओं के दूध की जांच कराई, जो 15 दिन से लेकर ढाई साल पहले मां बनी थीं और बच्चों को स्तनपान करा रही हैं। सभी टेस्ट जयपुर, बीकानेर व अलवर के एनएबीएल अप्रूव्ड सेंटर पर कराए गए हैं। टेस्ट में आया कि खाने की थाली से लेकर पानी, फल, हरी सब्जी से जो कुछ मां के शरीर में पहुंच रहा है, वही शिशु को दूध में मिल रहा है। मिलावटी पनीर और दूध से मांओं में मेलामाइन जा रहा है। 97% मांओं के दूध में कीटनाशक मिला। डिटर्जेंट व यूरिया भी। अमोनियम, सल्फेट व फॉर्मेलिन माल्टोडेक्सट्रिन जैसे हानिकारक रसायन भी मिले। अलवर गवर्नमेंट कॉलेज के प्राणी विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. ममता शर्मा का कहना है- मिलावटी और खराब खान-पान, खेती में पेस्टीसाइड्स के अनियंत्रित उपयोग और लाइफस्टाइल से ये स्थिति बनी है। दूध में ये खतरनाक तत्व मिले केस-1 मां की उम्र: 42
बच्चे की उम्र: ढाई साल
दूध मात्रा: 30 एमएल
फॉर्मेलिन: 0. 07%
वेजिटेबल ऑइल: .60%
यूरिया: 0.1%
डिटर्जेंट: 0.07%
फ्रक्टोज: 0.23% केस-2 मां की उम्र: 27
बच्चे की उम्र: 15 दिन
दूध मात्रा: 30 एमएल
पीएच: 6.73
अमोनियम: 0.6%
मैल्टोडेक्सट्रिन: 0.20%
मेलामाइन: 0.37%
सल्फेट: 0.06% केस-3 मां की उम्र : 30
बच्चे की उम्र : 9 महीने
दूध मात्रा : 30 एमएल
अमोनियम 0.11%
सल्फेट 0.10%
फॉर्मेलिन 0.13%
मैल्टोडेक्सट्रिन: 0.27%
फ्रक्टोज : 0.20% केस-4 मां की उम्र : 28
बच्चे की उम्र : 11 महीने
दूध मात्रा : 25 एमएल
डिटर्जेंट 0.03%
सल्फेट 0.5%
माल्टोस : 0.14%
फैट: 2. 68%
वेजिटेबल ऑइल: 0.20% केस-5 मां की उम्र : 26 साल
बच्चे की उम्र : 2 दिन
दूध मात्रा : 20 एमएल
वेजिटेबलऑइल 7.34%
माल्टोस : 4.37% केस-6 मां की उम्र : 32
बच्चे की उम्र : 2.5 माह
दूध मात्रा : 25 एमएल
वेजिटेबल ऑइल 4.34%
माल्टोस : 6. 32% खतरा… शिशु को पेट के संक्रमण, दस्त, उल्टी, किडनी रोग हो सकते हैं सीनियर फिजिशियन डॉ. पुनीत गुप्ता के अनुसार दूध में क्या होना चाहिए WHO के अनुसार बच्चों की अच्छी सेहत के लिए मां का दूध सबसे अच्छा है। दूध में प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल होना चाहिए। इम्यूनिटी बूस्टर तत्व होने चाहिए। इसमें 88% पानी, 7% कार्बोहाइड्रेट, लैक्टोज, 4% सेचुरेटेड और अनसेचुरेटेड वसा, दोनों लगभग बराबर मात्रा में, 1% प्रोटीन और कैसिइन स्वस्थ माना जाता है। कुछ मात्रा में खनिज और इम्युनोग्लोबिन होना चाहिए। दूध में क्या मिला, जो नहीं होना चाहिए मां के दूध के सैंपल में फाॉर्मेलिन, डिटर्जेंट, वेजिटेबल ऑइल, यूरिया, मेलामाइन और अमोनियम पाए गए। सीनियर गायनकोलॉजिस्ट डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि यह मात्रा भले ही मामूली लगे, लेकिन शिशु के लिए यह सामान्य नहीं है। पौष्टिक दूध के लिए मां को क्या करना होगा स्तनपान करा रहीं माएं ऑर्गेनिक खेती से उगाए गए धान-अनाज-दालें ही लें। बाहर का खाना बिलकुल बंद रखें। सब्जियों को पकाने के पहले 2 घंटा भिगोएं। बीकानेर के होम साइंस कॉलेज के फूड एंड न्यूट्रीशन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ममता चौहान के मुताबिक मैदा, चीनी, नमक ना खाएं। फ्रिज में रखा बासी और डिब्बाबंद भोजन न करें। रंग डाला हुआ खाना पूरी तरह बंद कर दें। भास्कर एक्सपर्ट- डॉक्टर हिमानी शर्माक्लिनिकल हेड, कोकून हॉस्पिटल पेस्टीसाइड्स पर रोक लगाना सबसे जरूरी मां के दूध में डिटर्जेंट, मेलामाइन, यूरिया, अमोनियम जैसे रसायन शिशु की नाजुक पाचन क्रिया को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पेट के संक्रमण, दस्त व उल्टी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। मेलामाइन और यूरिया किडनी संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। फॉर्मेलिन और सल्फेट से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है। सरकार को पेस्टीसाइड्स पर रोक लगानी होगी, क्योंकि दुनिया के तमाम देश इस दिशा में आगे बढ़ गए हैं।
