उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, छत्तर मंजिल परिसर, कैसरबाग में ‘मौन सिक्के, मुखर इतिहास’ विषय पर दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रशांत श्रीवास्तव मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम में निदेशक रेनू द्विवेदी, मुद्राशास्त्र अधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह और उत्खनन अधिकारी राम विनय उपस्थित थे।प्रो. श्रीवास्तव ने भारत की प्राचीन मुद्राओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सिक्कों के स्वरूप और निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी। सिक्कों की ऐतिहासिक महत्ता पर विशेष चर्चा हुई कार्यक्रम में पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से आहत सिक्कों से लेकर गुप्त और उत्तरगुप्त काल तक के सिक्कों का इतिहास समझाया।कार्यशाला में उत्तर मौर्य काल, शक-पहलव, ईरानी और कुषाण काल के सिक्कों की ऐतिहासिक महत्ता पर विशेष चर्चा हुई। लखनऊ और आसपास के जिलों से 150 से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए। डॉ. मनोज कुमार यादव ने कार्यक्रम का संचालन किया। ज्ञानेन्द्र कुमार रस्तोगी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पुरातत्व निदेशालय के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
