दीपावली के मद्देनजर विशेष जांच अभियान में जुटी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम फलों पर भी नजर रख रही है। शुक्रवार को 400 किलो केला नष्ट कराया गया। देखने में यह केला काफी सुंदर लग रहा था लेकिन वह खाने लायक नहीं था। केमिकल के घोल में उसे पकाया गया था। केले का जो हिस्सा हरा रह गया, उसपर पीला रंग पोता जा रहा था। यह रंग काफी हानिकारक है। जांच में प्रथम दृष्टया मिलावट की पुष्टि होने पर केला जब्त कर लिया गया और उसे नष्ट करा दिया गया। मिलावट का यह खेल केवल एक क्षेत्र में नहीं है। कई लोग यह खेल कर रहे हैं। नुकसान आम आदमी को हो रहा है। जिस पीले रंग को केले पर लगाया जा रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। व्यापारी इसे छोटी सी बात मानते हैं लेकिन जो केला खाते हैं, उनके लिए यह काफी नुकसानदायक होता है। जानिए किस केमिकल में पकाते हैं केला आजकल केला पकाने के लिए इथेफॉन नामक केमिकल का उपयोग किया जाता है। इसे पानी में घोलकर केला पकने के लिए डाल दिया जाता है। केला पकने में 24 से 48 घंटे का समय लगता है। पहले सूखे स्थान पर केला पकाया जाता था लेकिन अब केमिकल डालकर इसे पकाया जा रहा है। केमिकल के घोल में केला पकाने पर रोक नहीं है लेकिन इसकी मात्रा सीमित होनी चाहिए। जब केमिकल का उपयोग वैध है तो खतरनाक क्यों होता है दरअसल केले को पकाने के लिए 100 पीपीएम से अधिक रसायन का घोल नहीं होना चाहिए। आसान भाषा में 1 किलो केला पकाने के लिए 100 मिलीग्राम केमिकल का प्रयोग करना होता है। लेकिन केला को जल्दी पकाने के लिए केमिकल की मात्रा बढ़ाकर उपयोग की जा रही है। अधिक मात्रा में केमिकल डालने से केला जल्दी पक जाता है। ऐसा केला जल्दी पिलपिला भी हो जाता है। केमिकल का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक होता है। नवरात्र में धड़ल्ले से चला यह खेल नवरात्र में अधिकतर घरों मे लोग केला लेकर जाते थे। दावा है कि उस समय केला सुबह हरा रहता था तो दोपहर को पीला हो जाता। रात के समय इसी दुकान का केला पिलपिला नजर अता है। नवरात्र के समय इसकी ब्रिक्री बढ़ गई थी। दुकानदार पानी में अधिक मात्रा में केमिकल मिलाकर इसे पकाते हैं। इसके बाद बचे भाग को रंगते हैं। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डा. सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि केले को पकाने के लिए अधिक मात्रा में केमिकल का उपयोग सही नहीं है। सह 100 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए। कई व्यापारी केला को रंगते हैं, यह भी सही नहीं है। दूसरे केमिकल का भी करते हैं प्रयोग केला पकाने के लिए इथेफॉन के अलावा दूसरे केमिकल का भी उपयोग किया जाता है। कुछ दिन पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस केमिकल की प्राथमिक जांच की थी। पैकेट पर इथेफॉन लिखा था लेकिन अंदर जांच में वह नहीं पाया गया। गहन जांच के लिए सैंपल लैब में भेजा गया है।
