13 लाख खर्च, बच्ची को खोया, मुआवजा 4 लाख:बेटी बोली-“पापा घर ले चलो”: 22 दिन नाली किनारे रात गुजारी, छिंदवाड़ा-बैतूल में बच्चों को खोने वालों का दर्द

“पापा घर ले चलो”… ये वो शब्द थे जो 2 साल की योगिता ने अपनी अंतिम सांस तक कहे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। दो दिन में किडनी फेल होने से योगिता की जान चली गई और परिवार ने इलाज में 13 लाख रुपए खर्च कर दिए। अब सरकार ने 4 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया है। योगिता के पिता सुशांत ठाकरे का कहना है कि इससे उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती। यह दर्द छिंदवाड़ा के एक पिता सुशांत का है। ऐसा ही दर्द बैतूल के किसान कैलाश भी झेल रहे हैं। अपने बेटे की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन 4.5 लाख रुपए में गिरवी रख दी और इलाज पर 5 लाख रुपए खर्च कर दिए। अब वे अपनी जमीन वापस पाने और गलत इलाज करने वाले डॉक्टर और दवा कंपनी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। भास्कर टीम ने छिंदवाड़ा और बैतूल में बच्चों को खोने वाले ऐसे ही परिवारों का दर्द जाना। किसी ने इलाज में जिंदगी भर की जमा पूंजी लगा दी, तो किसी ने अपने जेवर गिरवी रख दिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट पढ़िए… सबसे पहले पूरा घटनाक्रम…14 बच्चों की मौत, डॉक्टर गिरफ्तार छिंदवाड़ा जिले के परासिया में 14 बच्चों की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ. प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। डॉ. सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। जांच में सिरप कोल्ड्रिफ में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) की पुष्टि हुई है, जिसे बच्चों की मौत का कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डॉ. सोनी को निलंबित कर दिया गया है। इस बीच, बैतूल में भी कोल्ड्रिफ की वजह से दो बच्चों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने भी डॉ. सोनी से इलाज कराया था, जिसके बाद बच्चों की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। एक बच्चे को नागपुर और फिर भोपाल ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस मामले की जांच कर रही है। योगिता का छिंदवाड़ा से नागपुर तक का सफर छिंदवाड़ा निवासी योगिता के पिता सुशांत ठाकरे ने बताया कि वे हमेशा डॉक्टर ठाकुर से अपनी बेटी का इलाज करते थे, लेकिन इस बार जब बुखार आया तो वह 8 सितंबर की शाम को 7 बजे तक का इंतजार नहीं कर पाए और अपनी बेटी योगिता को लेकर शाम के 5 बजे डॉ ठाकुर के नहीं मिलने पर प्रवीण सोनी के पास पहुंच गए। इस दौरान प्रवीण सोनी के द्वारा सिरप लिखा गया, जिसके बाद वह अपनी बेटी को लेकर घर आ गए। चार टाइम दी जाने वाली दवाई से अगले दिन 9 सितंबर को बुखार कम हुआ, लेकिन बिटिया ने हरे रंग की उल्टियां की जिससे घर में मौजूद दादा-दादी सहित मम्मी पापा घबरा गए और दोबारा डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास पहुंचे। दिन था 9 सितंबर का, डॉक्टर ने जांच के बाद सुशांत को बोल दिया कि अपनी बेटी को लेकर नागपुर चले जाओ क्योंकि बेटी योगिता की किडनी में इन्फेक्शन हो गया है जिसका इलाज छिंदवाड़ा में नहीं हो पाएगा। इसको आप लेकर सीधे नागपुर चले जाओ। यह बात सुनते ही सुशांत अपनी बेटी को लेकर तत्काल नागपुर के लिए निकल गए। इस दौरान जिस आस्था अस्पताल का पता डॉक्टर प्रवीण सोनी के द्वारा बताया गया था उस अस्पताल में पहुंचने पर पता चला कि योगिता को डायलिसिस की जरूरत है जो उनके पास नहीं है इसके चलते रात को 2:00 बजे नेल्सन हॉस्पिटल में योगिता को भर्ती किया गया जहां 22 दिन तक उसका इलाज चल इस दौरान 16 डायलिसिस हुए। 13 लाख रुपए खर्च किए, मदद भी नहीं मिली नागपुर के नेल्सन हॉस्पिटल का ही बिल 12 लाख से अधिक का हो गया। इस मुश्किल घड़ी में पिता सुशांत ने छिंदवाड़ा कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई, जिस पर कलेक्टर ने सीएमएचओ को मामले में दखल देने को कहा। अगले ही दिन सीएमएचओ ने सुशांत को फोन कर डांटा और कहा कि जब आर्थिक स्थिति खराब होती है तभी आप लोगों को शासकीय अस्पताल की याद आती है। इसके बाद उन्होंने बिटिया को मेडिकल ले जाने की बात कही, जिस पर सुशांत बिटिया को लेकर मेडिकल पहुंचे, लेकिन एक दिन भर्ती रहने पर भी कोई विशेष इलाज ना होता देख योगिता को फिर से वह लता मंगेशकर अस्पताल ले गए जहां पर एक अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक वह भर्ती रही। इस दौरान इस अस्पताल का बिल 1 लाख रुपए बन गया। 4 बजे योगिता जिंदगी से हारी
4 अक्टूबर की दोपहर 1 बजे योगिता ने दम तोड़ दिया। सुशांत और शिवानी ने अपनी पहली संतान को 2 साल की उम्र में ही खो दिया। अब परिवार में दुख का माहौल है। दादा की लाडली पोती, जिसके लिए दादा ने अपने बेटे को इलाज में लापरवाही को लेकर डांट भी लगाई थी, उसे खो दिया। सुशांत का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि किसी और के घर का चिराग ना बुझे।
सुशांत आर्थिक रूप से भी अब टूट चुके हैं। प्राइवेट स्कूल में शिक्षक के पद पर पदस्थ सुशांत ठाकरे की मदद के लिए बड़े भाई ने FD तोड़ी, दोनों बहनों ने भरपूर मदद की और उनके दोस्त आगे आए सभी ने अपनी अपनी तरफ से कोशिश की। लेकिन लगातार इलाज में हो रहे खर्च के चलते और पैसों की आवश्यकता थी, जिसके चलते एक संस्था ने सोशल मीडिया में इलाज से संबंधित खर्चे में मदद की जानकारी लगते ही ₹100000 की मदद की। यह संस्था मुंबई की एकम फाउंडेशन है, इसके अलावा दोस्तों ने भी मिलकर 2 लाख से अधिक की मदद की। 22 दिन तक नाली के पास सोए, भूखे पेट रहे नागपुर में इलाज के दौरान गुजरे दिनों की बात करते हुए सुशांत ने बताया कि पत्नी शिवानी, अपने पिता और कुछ रिश्तेदारों के साथ नेल्सन हॉस्पिटल के बेसमेंट में 22 रातें गुजारीं थीं। बेसमेंट में गंदा पानी निकालने के लिए बनी नाली के किनारे परिवार के साथ रात गुजारते थे। इस बीच अस्पताल से “योगिता के परिवार के सदस्य आ जाओ” की आवाज सुन तुरंत भागते थे। खाने का ठिकाना नहीं रहता था, कभी कुछ पैक करा कर ले आए तो सभी बैठकर नीचे खा लिया, नहीं तो भूखे पेट ही दिन गुजर रहा था। बस उम्मीद यही थी की बेटी जल्दी ठीक हो जाए पर ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री द्वारा 4 लाख दिए जाने की घोषणा करने पर सुशांत कहते हैं कि सरकार यह राशि अपना पल्ला झाड़ने के लिए दे रही है। लोगों के इलाज के लिए 12 से 15 लाख रुपए खर्च हुए हैं, लेकिन बच्चों की जान नहीं बच पाई सभी ने भरपूर कोशिश की लेकिन बच्चे को नहीं बचा पाए। पोस्टमॉर्टम को लेकर एसडीएम के गोलमोल जवाब
परासिया एसडीएम शुभम कुमार यादव का एक वीडियो सामने आया। इसमें मीडियाकर्मी उनसे मृत बच्चों के पोस्टमॉर्टम के बारे में सवाल कर रहा है। पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं कराया, इस सवाल पर एसडीएम यादव ने कहा- बच्चों से लगाव के चलते पेरेंट्स पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार नहीं थे। इस पर मीडियाकर्मी ने कहा- एक बच्चे के परिजन ने ऐसे आरोप लगाए हैं कि वे पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार थे। प्रशासन ने इस बारे में कुछ कहा ही नहीं। इस पर एसडीएम ने कहा- सभी बच्चों की मौत नागपुर में ही हुई है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम करवाने के लिए पेरेंट्स का तैयार होना जरूरी था। इसके बाद वे गोलमोल जवाब देने लगे। अब तक जिले में कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी- ADM
छिंदवाड़ा एडीएम धीरेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक जिले में कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी है। परासिया में 11 छिंदवाड़ा में 2 और चौरई में 1 बच्चे की मौत हुई है। परिजन को प्रदेश सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी स्वीकृत की गई है। अभी नागपुर में 8 बच्चे भर्ती हैं, जो प्रायवेट, एम्स और सरकारी हॉस्पिटल में इलाज जारी है। एडीएम ने कहा- आज जो पोस्टमॉर्टम हुआ है, मृत बच्ची के परिजन के कहने पर किया गया है। जबकि परिजन ने योगिता ठाकरे को बड़कुई में दफन कर दिया था। अब बात बैतूल की-जहां इलाज के लिए गिरवी रखी जमीन पिता बोले- दवा और डॉक्टर ने बेटा-जमीन दोनों छीना
बैतूल के कलमेश्वरा गांव के रहने वाले कबीर के पिता कैलाश यादव बार-बार अपने मोबाइल पर बेटे की फोटो देखकर उसे याद करते हैं। उन्होंने उस कफ सिरप की शीशी भी संभालकर रखी है। वे कहते हैं- इस कोल्ड्रिफ की वजह से मेरा बच्चा चला गया। जमीन भी छिन गई। अब सरकार डॉ. सोनी पर कार्रवाई करे। दवा कंपनी पर कार्रवाई हो, मेरी जमीन छुड़वा दो।
एक हफ्ते के इलाज में 5 लाख का खर्च आ गया। इसके लिए मैंने अपनी तीन एकड़ जमीन गिरवी रख दी थी। डॉ. सोनी ने भी 20 हजार रु लिए, पर बच्चे को मौत दे दी। कोल्ड्रिफ और डॉक्टर की वजह से बच्चा भी गया, जमीन भी गई। किडनी खराब हो गई थी। मेरी जमीन वापस मिल जाए। सर्दी-जुकाम के इलाज से बिगड़ी तबीयत
कबीर को 24 अगस्त को सर्दी-जुकाम हुआ था। कैलाश उसे परासिया के डॉ. सोनी के पास ले गए। डॉक्टर ने ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप समेत तीन दवाएं लिखीं। सिरप को दिन में चार बार तीन-तीन एमएल देने के लिए कहा गया था। चार दिन तक यह दवा देने के बाद 29 अगस्त को बच्चे की तबीयत और बिगड़ गई। कबीर की पेशाब बंद हो गई। उसे खून की उल्टियां होने लगीं।
बेटे की हालत बिगड़ती देख कैलाश ने इलाज के लिए पैसों का इंतजाम करना शुरू किया। 30 अगस्त को उन्होंने गांव के ही सीताराम पटेल के पास अपनी तीन एकड़ जमीन साढ़े चार लाख रुपए में गिरवी रख दी। सीताराम ने उनसे कहा था- पैसे लौटाओ तो जमीन वापस मिलेगी। कैलाश बताते हैं- डॉक्टर ने कहा था दिन में चार बार कोल्ड्रिफ सिरप दो। जैसे-जैसे सिरप देते गए, हालत और बिगड़ती गई। पेशाब बंद हो गया, खून आने लगा। जब मैंने पूछा तो डॉक्टर नाराज हो गया। अब जांच होनी चाहिए। सिरप ने मारा या इलाज में लापरवाही हुई।

  • Related Posts

    Как электронный пространство меняет представление об досуге

    Как электронный пространство меняет представление об досуге Актуальная период компьютеризации радикально модифицирует общественное представление восстановления и времяпрепровождения. То, что только несколько лет ранее представляло полное отрыв от будничных активностей, сегодня…

    Как веяния влияют на создание современные виды развлечений

    Как веяния влияют на создание современные виды развлечений Актуальный век определяется молниеносными изменениями в области досуга и релаксации. То, что ранее представлялось чем-то необычным, теперь трансформируется в распространенным увлечением, а…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    Как электронный пространство меняет представление об досуге

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 2 views

    Как веяния влияют на создание современные виды развлечений

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 2 views

    Почему мы любим переживание влияния и фортуны

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 3 views

    Почему людям восхищают драматические события

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 2 views

    Зачем мы желает пережить переживания

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 2 views

    Fuel Your Winning Streak Effortless Entry with freshbet login & Exclusive Rewards for Dedicated Play

    • By admlnlx
    • November 21, 2025
    • 3 views