पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए जमीन दी, अब गुस्से में गांववाले:मुआवजा न देने का आरोप, क्या सीमांचल की 24 सीटों पर BJP का खेल बिगड़ेगा

‘पहले हमसे एयरफोर्स वालों के लिए जमीन ले ली, अब एयरपोर्ट के लिए ले ली गई। हमसे पूछा तो, लेकिन हमारी सुनी नहीं। अब तक मुआवजा नहीं मिला है। एयरपोर्ट बनने से BJP को फायदा होगा। लोग कह रहे हैं कि मोदीजी का काम है। जिनकी जमीन गई और मुआवजा नहीं मिला, उनका क्या।’ पूर्णिया के गोआसी गांव के रहने वाले भूमि पासवान के घर से नया बना एयरपोर्ट दिखता है। भूमि पासवान को गांव में रहते हुए 80 साल हो गए। उनकी 10 कट्ठा जमीन एयरपोर्ट में चली गई। 1962 की जंग के बाद पूर्णिया में एयरफोर्स स्टेशन बना था, जब भी किसानों की जमीनें गई थीं। अब एयरपोर्ट के लिए गोआसी के 75 किसानों की करीब 67 एकड़ जमीन ली गई है। 15 सितंबर, 2025 को PM नरेंद्र मोदी पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन करने आए थे। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग रिकॉर्ड 5 महीने से भी कम समय में बनाई गई है। यहां के सांसद पप्पू यादव एयरपोर्ट को अपना सपना बताते रहे हैं। पूर्णिया सीमांचल में आता है, जहां विधानसभा की 24 सीटें आती हैं। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान भले गुस्से हैं, लेकिन आसपास के लोग इससे खुश हैं। उनका मानना है कि एयरपोर्ट का मुद्दा NDA खासकर BJP अपने पक्ष में ले जाएगी। एयरपोर्ट का काम अधूरा, दो फ्लाइट शुरू
पूर्णिया एयरपोर्ट शहर से करीब 8 किमी दूर बना है। ये 2015 के PM पैकेज में शामिल था। 10 साल बाद इसका उद्घाटन हुआ है। हालांकि एयरपोर्ट का काम पूरा नहीं हुआ है। अभी स्थायी टर्मिनल बिल्डिंग और अधिकारियों के लिए ऑफिस भी नहीं बने हैं। टर्मिनल तक पहुंचने के लिए सड़क बन गई है। पार्किंग, ऑटो स्टैंड और बाकी सुविधाओं के लिए काम चल रहा है। अभी दो शहरों कोलकाता और अहमदाबाद के लिए फ्लाइट हैं। इंडिगो और स्टार एयर कंपनी ने ये उड़ानें शुरू की हैं। अभी स्टार एयर की उड़ानें हफ्ते में 4 दिन हैं। कंपनी 15 अक्टूबर से दोनों शहरों के लिए डेली फ्लाइट शुरू करने वाली है। एयरपोर्ट बनने से लोग खुश, क्या चुनाव पर असर दिखेगा
पूर्णिया से एयरपोर्ट तक आने-जाने के लिए बस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। लोगों को गाड़ी बुक करके या अपने वाहन से ही आना पड़ता है। इसके बावजूद एयरपोर्ट पर ठीक-ठाक भीड़ थी। सेल्फी लेने वाले और सफर करने वाले दोनों ही तरह के लोग एयरपोर्ट पर थे। यहां मिले अब्दुल रहमान पूर्णिया में रहते हैं। एयरपोर्ट से घर 20 किमी दूर है। अब्दुल के चाचा उन्हें बाइक से एयरपोर्ट छोड़ने आए थे। अब्दुल की हैदराबाद में हार्डवेयर की दुकान है। वे बताते हैं कि पहले सिलिगुड़ी के बागडोगरा एयरपोर्ट से सफर करते थे। पूर्णिया से बागडोगरा जाने में 4 से 5 घंटे लगते थे। अब घर से एयरपोर्ट आने में आधा घंटा लगता है। क्या एयरपोर्ट का चुनाव पर असर पड़ेगा? इसका जवाब अब्दुल के चाचा अबू जफर देते हैं। अबू कहते हैं, एयरपोर्ट बनने से लोग खुश तो हैं। अब भागलपुर, बागडोगरा या दरभंगा जाने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव पर भी इसका असर दिख सकता है। एयरपोर्ट से फायदा हुआ है, ये मुद्दा जरूर बनेगा। हालांकि अबू मानते हैं कि फायदा किसका होगा, ये कहना जल्दबाजी है। पप्पू यादव दावा कर रहे हैं कि उन्होंने एयरपोर्ट की मांग उठाई थी। BJP वाले कहते हैं कि हमने बनवाया है। अभी केंद्र और राज्य में BJP की सरकार है और सांसद पप्पू यादव हैं। इसमें दोनों का योगदान है।’ यहीं राम कुमार नाथ मिले। डेढ़ साल से इजराइल में नौकरी करते हैं। फैक्ट्री से एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे। दिल्ली होते हुए वापस इजराइल जा रहे थे। एयरपोर्ट से उनका घर करीब 15 किमी दूर है। राम कुमार कहते हैं, ‘पहले दिल्ली जाने के लिए ट्रेन पकड़नी पड़ती थी या फिर बागडोगरा से फ्लाइट मिलती थी।’ राम कुमार खुद कभी चुनाव में वोट डालने नहीं आ पाते, लेकिन उनके परिवार वाले एयरपोर्ट से खुश हैं। वे मानते हैं कि चुनाव में एयरपोर्ट का असर दिखेगा। राम कुमार कहते हैं, ‘धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से JDU की लेसी सिंह विधायक हैं। यहां लोग कह रहे हैं कि जिसने एयरपोर्ट बनाया है, वोट उसी को देंगे। यहां लोग 5-10 साल से सपना देख रहे थे कि काश एयरपोर्ट होता, तो दिल्ली 2 घंटे में पहुंच जाते।’ ‘सुविधा कम, लेकिन पूर्णिया को फायदा हुआ’
पूर्णिया से 80 किमी दूर भागलपुर से साहू परबत्ता ब्लॉक की रहने वाली निशा साहू एयरपोर्ट बनने को बड़ी राहत बताती हैं। वे अक्सर कोलकाता जाती रहती हैं। पहले भागलपुर से ट्रेन से जाती थीं। इसमें 8 से 9 घंटे लग जाते थे। अब सिर्फ एक घंटे में कोलकाता पहुंच जाती हैं। निशा कहती हैं, ‘वक्त और पैसा दोनों की बचत होगी। फायदा तो सबको मिलेगा। जो काम करेगा, जनता उसे ही फायदा देगी।’ कटिहार के रहने वाले मोहम्मद आसिफ कोलकाता जा रहे थे। वे कहते हैं कि एयरपोर्ट बनने से सफर आसान हुआ है, लेकिन अभी टैक्सी की सुविधा कम है। धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ेंगी। जिस सरकार ने इसे बनवाया, उसे इसका फायदा जरूर मिलेगा।’ अब गांव वालों की बात जमीन के सही रेट नहीं मिल रहा, केस कोर्ट में
एयरपोर्ट दीवार के ठीक पीछे गोआसी गांव बसा है। इसी गांव के लोगों की जमीन पर एयरपोर्ट बना। गांववालों का आरोप है कि उनकी मर्जी के बिना जमीन ले ली गई। इसके अलावा खेती की जमीन का मुआवजा 17-18 हजार रुपए डिसमिल की हिसाब से मिल रहा है। घर की जमीन का 2.5 लाख रुपए डिसमिल तय है। गांववालों का कहना है कि कई रेजिडेंशियल लैंड को खेती की जमीन बता दिया है। इसीलिए गांव वालों ने अब तक मुआवजा नहीं लिया है। वे पटना हाईकोर्ट चले गए हैं। गांव में ज्यादातर सब्जी उगाई जाती है। जमीन जाने के बाद लोग अस्थायी घर बनाकर रह रहे हैं। गांव की अनीता देवी की पांच कट्ठा जमीन एयरपोर्ट चली गई। उनके 5 बच्चे हैं। अनीता घर बनाने की तैयारी कर रही थीं। वे कहती हैं, ‘हमारी जमीन पर बांस लगे थे। उन्हें बेचकर घर चलता था। एक बांस 100 रुपए में बिकता था। अब जमीन ही चली गई।’ ‘कहा गया था कि 15 लाख रुपए का भाव देंगे। अब कहा जा रहा है कि 70 हजार के हिसाब से पैसे ले लो, नहीं तो छोड़ दो। इसलिए हमने पैसा नहीं लिया है।’ ‘थाने ले गए, साइन कराए, दबाव डालकर ली जमीन’
गांववालों का आरोप कि पहले एयरपोर्ट के लिए दूसरे गांवों की जमीन ली जानी थी। कुछ रसूखदारों के दबाव में फैसला बदला गया। गोआसी गांव के चंद्र किशोर यादव आरोप लगाते हैं, ‘पहले एयरपोर्ट के लिए मुगल टोली और आदमपुर में जमीन ली जानी थी। नेताओं और अधिकारियों ने कह दिया कि वहां दलदल है। इसी बहाने हमारी तरफ की जमीन ले ली गई।’ चंद्र किशोर प्रशासन पर जबरन जमीन अधिग्रहण का भी आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं, ‘हम जमीन देने को तैयार नहीं थे। एक रात करीब 1:30 बजे सरकारी अफसर आए और 10-12 लोगों को उठा कर मरंगा थाना ले गए। बड़े बाबू ने कहा कि ऐसा केस बना देंगे, जिंदगी भर बेल नहीं मिलेगी। इसके बाद दिल्ली की टीम आई और हमसे जबरन साइन करवा लिए।’ चंद्र किशोर यादव मानते हैं कि एयरपोर्ट से गांव में नाराजगी है। इसका असर चुनाव में दिखेगा। वे कहते हैं कि कोई नेता गांव में नहीं आया। यहां लोग पहले BJP को वोट देते थे। इस बार सोच रहे हैं कि किसी को वोट नहीं देंगे। पूर्णिया शहर में लोग खुश, लेकिन चुनाव में मुद्दा नहीं मानते
गोआसी गांव के बाद हम पूर्णिया शहर पहुंचे। यहां लोगों से एयरपोर्ट के चुनाव पर असर को लेकर बात की। बाइक सर्विस करने वाले 28 साल के इकराम एयरपोर्ट को शहर के लिए फायदेमंद मानते हैं। वे कहते हैं, ‘एयरपोर्ट बनने से यहां हर राज्य से लोग आएंगे। यहां सारी सुविधाएं हैं। अब हम लोगों को बाहर ट्रैवल करने में आसानी होगी।’ इकराम मानते हैं कि चुनाव में एयरपोर्ट का किसी एक पार्टी को सीधे फायदा नहीं मिलेगा। वोटिंग को एयरपोर्ट से नहीं जोड़ा जा सकता। ये अलग मामला है। वोटिंग करने वाले में से सिर्फ 2 या 4% लोग ही एयरपोर्ट से सफर कर पाएंगे। 18 साल के नवीन कुमार पहली बार वोट डालेंगे। वे कहते हैं कि गवासी में जहां एयरपोर्ट बना है, वहां सड़कों की हालत बहुत खराब है। मिट्टी के रास्ते हैं। पक्की सड़क नहीं बनी।’ एक्सपर्ट बोले- एयरपोर्ट का NDA को फायदा होगा
एयरपोर्ट के क्षेत्र पर असर को समझने के लिए हमने सीनियर जर्नलिस्ट पंकज भारती से बात की। वे कहते हैं कि एयरपोर्ट बनना पूर्णिया और सीमांचल के लिए ऐतिहासिक घटना है। लोग एक दशक से इसका इंतजार कर रहे थे। ‘यहां का कैचमेंट एरिया बड़ा है। कारोबार, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन और मेडिकल का हब है। इतनी संभावनाओं के बावजूद एयरपोर्ट का न होना पूर्णिया के साथ नाइंसाफी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 विधानसभा चुनाव से पहले यहां एयरपोर्ट बनवाने का वादा किया था। 10 साल बाद सही, लेकिन अब वादा पूरा हुआ है।’ चुनाव पर असर को लेकर पंकज मानते हैं, एयरपोर्ट NDA के लिए प्लस पॉइंट है। हालांकि यह बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बनेगा। इसकी प्रोसेस यूपीए की सरकार में शुरू हुई थी। पंकज आगे कहते हैं कि चुनाव में जाति और धर्म का समीकरण प्रमुख भूमिका निभाता है। एयरपोर्ट को लेकर NDA को आंशिक फायदा मिलेगा। सीमांचल की 24 सीटों पर इसका असर दिख सकता है। सीमांचल में कांग्रेस और AIMIM भी बड़े फैक्टर
कांग्रेस इस बार सीमांचल के 4 जिलों कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया में 5 नई सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। 2020 में पार्टी ने यहां की 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इन्हें भी पार्टी अपने पास रखना चाहती है। यानी सीमांचल में कांग्रेस इस बार 14 सीटें मांग रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अररिया, कदवा, कसबा, किशनगंज, कोढ़ा, पूर्णिया, प्राणपुर, अमौर, बहादुरगंज से चुनाव लड़ी थी। इनमें अररिया, कदवा, किशनगंज और कसबा में जीत मिली थी। बाकी 5 सीटें पार्टी हार गई थी। अब कांग्रेस रानीगंज, नरपतगंज, कोचाधामन, बायसी और बनमनखी सीट पर दावा कर रही है। 17 अगस्त से एक सितंबर तक चली राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा 23 जिलों से निकली थी। इनमें सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया और अररिया कवर किए गए थे। सीमांचल में AIMIM का भी प्रभाव है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल की 5 सीटें जीती थीं। हालांकि बाद में उसके चार विधायक RJD में शामिल हो गए, लेकिन पार्टी की मौजूदगी और वोट बैंक का असर अब भी बरकरार है। चुनाव से पहले AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी एक्टिव हो चुके हैं। वे किशनगंज से सीमांचल न्याय यात्रा निकाल चुके हैं। ये यात्रा सीमांचल के चारों जिलों किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया से निकली। इस दौरान ओवैसी ने करीब 100 किमी दूरी तय की। एयरपोर्ट डायरेक्टर बोले- बचा काम जल्द ही पूरा होगा
एयरपोर्ट के उद्घाटन के वक्त PM मोदी ने जिस टर्मिनल बिल्डिंग को रिकॉर्ड पांच महीने में तैयार हुआ बताया था, वह पोर्टा केबिन (अस्थायी) है। हमने एयरपोर्ट डायरेक्टर दीप प्रकाश गुप्ता से भी बात की। वे बताते हैं, ‘15 तारीख से एयरपोर्ट पूरी तरह से ऑपरेशनल हो गया है और रेगुलर फ्लाइट चल रही हैं। सोमवार से शुक्रवार तक फ्लाइट ऑपरेट हो रही हैं। जल्द ही शनिवार और रविवार को भी सर्विस शुरू होगी। दिल्ली और दूसरे शहरों के लिए सर्विस बढ़ाने की कोशिश चल रही है।’ एयरपोर्ट पर अधूरे काम पर डायरेक्टर कहते हैं कि सिविल टीम इसे देख रही हैं। इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कोई टाइम फ्रेम नहीं बताया। किसानों की शिकायत पर डीपी गुप्ता सीधा जवाब नहीं देते। कहते हैं, ‘मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि मैंने 6-7 दिन पहले ही जॉइन किया है। इस पर प्रोजेक्ट टीम ही बेहतर जानकारी दे पाएगी।’

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