इस बार नवरात्रि उत्सव में साबूदाना खिचड़ी को खूब पसंद किया जा रहा है। यूं तो इंदौर में हर सोमवार खासकर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि सहित अन्य मौकों पर साबूदाना खिचड़ी व्रतधारियों की पहले पसंद रहती है, लेकिन नवरात्रि के पूरे नौ दिन खिचड़ी के ठेले हर क्षेत्र में सज जाते हैं। इस बार तो नवरात्रि में पूरे देश में साबूदाना की बंपर आवक हुई है। खास बात यह कि पिछले साल की तुलना में भाव में भी 40% गिरावट आने से इंदौर में भी चार गुना साबूदाना बिका है और अभी भी डिमांड बनी हुई है। दरअसल इंदौर में साबूदाना की खिचड़ी किसी भी स्थान की हो लोगों द्वारा फलाहार के रूप में रोज सेवन की जा रही है। वैसे दो साल पहले इंदौर में हुए NRI सम्मेलन में देश-विदेश से आए अतिथियों, उद्योगपतियों और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदौर की खिचड़ी और मोरधन की खीर को काफी पसंद किया था।
इस बार साबूदाना को लेकर क्यों है इतना बड़ा बूम
साबूदाना और अन्य शुद्ध पोषक फरियाली उत्पादों के निर्माता और संस्थापक चेयरमैन गोपाल साबू (सेलम, तमिलनाडु) ने बताया कि हाल ही में घोषित नई जीएसटी दरों के अनुसार ‘टेपीयोका स्टार्च’ (Tapioca Starch) पर वर्तमान 12% जीएसटी दर को घटाकर 5% किया गया है। इस कारण इस साल साबूदाना की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही है जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह और अधिक सुलभ हुआ है। साथ ही व्रत-उपवास के लिए साबूदाना एक लोकप्रिय, स्वादिष्ट और पोषणयुक्त विकल्प बना हुआ है।
इसका असर यह हुआ कि इस वर्ष नवरात्रि से पहले ही, देश-विदेश से आने वाली दिशावर मंडियों से साबूदाना की मांग लगभग 1.5 गुना बढ़ गई है। बढ़ती मांग की सप्लाय बनाए रखने के लिए, कंपनी की उत्पादन इकाई की टीम ने पिछले 15 दिनों से दिन-रात काम करते हुए सप्लाय चैन को निर्बाध रूप से संचालित रखा। इस प्रयास में कंपनी के वितरकों और विक्रेताओं ने भी पूरा सहयोग दिया, जिससे ग्राहकों को सभी उत्पाद समय पर और ताजगी के साथ उपलब्ध हो सके। इंदौर में भी साबूदाना की खूब डिमांड बनी हुई है। इस वर्ष सेलम में उत्पादन अधिक हुआ है, जिससे मौजूदा बाजार दरें बीते वर्षों की तुलना में सबसे निम्न स्तर पर है। साबूदाना का इंदौरी कारोबार, भाव में 40% गिरावट
इंदौर के बड़े साबूदाना कारोबारी अमित छाबड़ा ने बताया कि इस बार साबूदाना की पैदावार ज्यादा होने से साबूदाना के भाव इस बार बहुत कम रहे। पिछले साल की तुलना में भाव 30 से 40% कम बने हुए हैं। इसके चलते खपत काफी बढ़ी है और बढ़ेगी। फलाहार के अन्य आइटम मोरधन, सिंघाडा आटा महंगा होने से भी साबूदाना की डिमांड बढ़ी है। इस बार कीमत लुढ़कने के दौरान नवरात्रि भी हैं इसके चलते भी चार गुना सप्लाई बनी हुई है। पिछले साल से 10 रुपए प्रति किलो कम
पिछले साल साबूदाना 58 रुपए किलो बिका था। इस साल यही साबूदाना 47-48 रु. प्रति किलो बिक रहा है। इंदौर में साबूदाना के 10 से ज्यादा बड़े कारोबारी हैं,जबकि कॉलोनियों-मोहल्लों से लेकर बाजार, मॉल्स तक राशन की हजारों छोटी-बड़ी दुकानें हैं। इन सभी पर आम दिनों और खासकर नवरात्रि पर पर्याप्त साबूदाना उपलब्ध है। बंपर आवक से दुकानों पर भीड़ दूसरी ओर साबूदाना की बंपर आवक होने से साबूदाना खिचड़ी की दुकानों, ठेलों पर भी लोगों की भी भीड़ बढ़ी है। इन दुकानों और ठेलों पर 30 से 40 रु. प्रति प्लेट खिचड़ी बिक रही है। एक अनुमान के मुताबिक नवरात्रि में विभिन्न बाजारों, मुख्य सड़कों, इंदौर-देवास रोड पर पैदल भक्तों के लिए और इसके अलावा सभी छोटे-बड़े मंदिरों, नवरात्रि पंडाल के बाहर आदि स्थानों पर 20 हजार खिचड़ी की दुकानें, ठेले लगे हुए हैं। कई स्थानों पर आयोजक और लोग भोजन प्रसादी के रूप में भक्तों को रोजाना खिचड़ी वितरित कर रहे हैं। यूं तो साबूदाना के बड़े, मिक्चर भी बाजारों में तैयार हैं, लेकिन लोग खिचड़ी ही ज्यादा पसंद करते हैं। 17 सालों से पूरे साल खिचड़ी का ठेला संचालित करने वाले रतन प्रजापत ने बताया कि उनकी तरह इंदौर के हजारों लोगों की जिंदगानी खिचड़ी से चलती है। अभी नवरात्रि पर तो जरा भी फुर्सत नहीं है। NRI सम्मेलन में मोदी और मेहमानों को खूब भा गई थी खिचड़ी
रतन और अन्य खिचड़ी दुकानदारों ने बताया कि NRI सम्मेलन में शामिल होने आए मेहमान उस दौरान सराफा आए थे। उन्होंने खिचड़ी को खाने के बाद खूब तारीफ की थी। प्रधानमंत्री मोदी खुद इंदौर के साबूदाना की खिचड़ी और मोरधन की खीर की तारीफ मेहमानों को कर चुके हैं।
