सिटी रिपोर्टर|जहानाबाद पंचायतों में सरकारी राशि खर्च करने में मनमानी का सिलसिला जारी है। पहले निश्चय योजना में बिना टैक्स कटौती के 300 करोड़ रुपए अनियमित ढंग से प्रदान कर दिए गए। अब वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समितियों के द्वारा बरती गई अनियमितता को लेकर पंचायती राज विभाग के अधिकारी परेशान हो रहे हैं। दरअसल वार्ड क्रियान्वयन समितियों को विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए करोड़ों रुपए की राशि आवंटित की गई थी। आवंटित राशि को समितियों ने बिना नियमों का ध्यान रखे 29 करोड़ 88 लाख रुपए खर्च कर दिए या फिर संबंधित लोगों ने पॉकेट में रख लिया, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं मिल रहा है। अब पंचायती राज विभाग के लिए उक्त भारी-भरकम राशि की वसूली टेढी खीर साबित हो रही है। जिला पंचायत राज पदाधिकारी के निर्देश जारी होने के बाद भी अब तक किसी भी वार्ड एवं क्रियान्वयन प्रबंधन समिति के द्वारा अग्रिम राशि वापस नहीं की गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री निश्चय योजना के तहत वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को दो साल पहले दिए गए 29 करोड़ 88 लाख रुपए का कोई लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किए जाने का मामला ऑडिट रिपोर्ट के दौरान प्रकाश में आया था। ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी लेखपाल सह आईटी सहायकों को निर्देश दिया था कि उक्त राशि को आवश्यक कागजात प्रस्तुत कर समायोजित करा लिया जाए। लेकिन अब तक इस दिशा में बात आगे नहीं बढ़ सकी है। ऑडिट रिपोर्ट में खुली अनियमितता की पोल ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि 29 करोड़ 88 लाख रुपए अग्रिम के तौर पर वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के पास पड़े हैं। जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने जिले के सभी लेखपाल सह आईटी सहायकों को कहा है कि उन लोगों की नियुक्ति वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का लेखा बुक संधारण, अभिलेख संधारण एवं अंकेक्षण कार्यक्रम का निष्पादन के लिए ही की गई है। लेकिन, लेखपालों के द्वारा अंकेक्षण जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय कार्य में घोर लापरवाही बरते जाने की वजह से असमायोजित राशि अग्रिम के रूप में दिखाई जा रही है। वर्तमान जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने पूरे मामले की अपने स्तर से जांच करके अनियमितता के दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने सभी लेखपालों को निर्देश दिया है कि अग्रिम राशि को 2022-23 के अंकेक्षण के क्रम में आवश्यक कागजात प्रस्तुत कर समायोजित करा लिया जाए अन्यथा अनुपालन नहीं होने की स्थिति में लेखपाल एवं वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति के विरुद्ध वित्तीय अनियमिता एवं सरकारी राशि गवन का मामला मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
