चंद्रग्रहण के अवसर पर काशी सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे। ग्रहण के स्पर्श, मध्य और मोक्ष तीनों कालों में बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। हालांकि गंगा के बढ़े जलस्तर और तेज धारा के कारण श्रद्धालुओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुरक्षा की दृष्टि से लोगों को जल में अधिक देर रहने की अनुमति नहीं दी गई। रसोई में रखा गया कुश और तुलसी का पत्ता गंगा घाटों पर स्नान के लिए आए आस्थावानों ने ग्रहण काल के नियमों का पालन किया। कई श्रद्धालु सूतक काल शुरू होते ही प्रभु आराधना में लीन हो गए। परंपरा के अनुसार सूतक से पूर्व ही घरों में भोजन कर लिया गया और रसोई में रखे खाद्य पदार्थों की पवित्रता बनाए रखने के लिए उनमें तुलसी पत्ते और कुश डाल दिए गए। बड़ी संख्या में भक्तों ने अपने घरों के मंदिरों के कपाट बंद कर दिए और ग्रहण की अवधि में जप, ध्यान और भजन-कीर्तन में व्यस्त रहे। 1.27 बजे तक लगा रहा ग्रहण गंगा में स्नान करने पहुंचे लोगों को जल पुलिस और प्रशासन ने लगातार सतर्क किया। घाटों पर तैनात पुलिस बल ने श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोका और बार-बार सीटियां बजाकर सावधान किया। दशाश्वमेध, अस्सी और भैसासुर घाट पर ग्रहण काल के दौरान सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। रात 09:57 बजे ग्रहण स्पर्श के साथ ही लोग घाट की सीढ़ियों पर खड़े होकर मंत्रजाप और स्नान करते दिखाई दिए। 11:41 बजे मध्य काल और 01:27 बजे मोक्ष काल में भी श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। इस दौरान घाटों पर दान-पुण्य का सिलसिला भी चलता रहा। बड़ी संख्या में भिखारी घाटों और गलियों में पहुंच गए और लोगों ने उन्हें अन्न, वस्त्र और दान-दक्षिणा प्रदान की। काशी के मंदिर रहे बंद ग्रहण के चलते काशी के अधिकांश मंदिर सूतक काल आरंभ होने से पहले ही बंद कर दिए गए। दिन में 12:57 बजे सूतक लगने से पहले संकटमोचन, दुर्गाकुंड दुर्गा मंदिर, कालभैरव, बड़ा गणेश और बीएचयू विश्वनाथ मंदिर सहित प्रमुख देवालयों के कपाट बंद हो गए। परंपरा के अनुसार केवल काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर खुले रहे। ये मंदिर ग्रहण काल शुरू होने से दो घंटे पूर्व बंद किए गए, लेकिन सूतक में भी यहां आरती और फलाहार का भोग अर्पित किया गया। शयन आरती से पूर्व गर्भगृह का श्रृंगार हटा दिया गया और संपूर्ण धाम की धुलाई की गई। दिन में 34 साल में 5वीं बार हुई गंगा आरती गंगा आरती का दृश्य भी इस बार विशेष रहा। प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति और गंगा सेवा निधि की ओर से विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती दिन में आयोजित की गई। सूतक काल शुरू होने से पूर्व पूर्वाह्न 11:45 बजे आरती का शुभारंभ हुआ और समय रहते संपन्न कर ली गई। 35 वर्षों में यह पांचवां अवसर था जब गंगा आरती दिन में हुई। इससे पहले 28 अक्टूबर 2023, 16 जुलाई 2019, 27 जुलाई 2018 और 7 अगस्त 2017 को भी चंद्रग्रहण के कारण आरती का समय बदला गया था।
