जालोर जिले के चांदना गांव में विवादित जमीन के नामांतरण (म्यूटेशन) को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार बाबूसिंह राजपुरोहित ने प्रशासनिक कारणों से एपीओ किए जाने और रिलीव ऑर्डर जारी होने के बावजूद म्यूटेशन स्वीकृत कर दिया। अब पीड़ित परिवार ने मामले की समीक्षा (रिव्यू) कर पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग की है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह म्यूटेशन पूरी तरह अवैध है और इसमें साठ-गांठ की गई है। परिवार ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नामांतरण को रद्द कर पूर्व की स्थिति बहाल करने की मांग की है। समझिए क्या है पूरा मामला चांदना गांव के गोविंद पुत्र रणछोड़ा राम देवासी ने सरहद मौजा चांदना की कई खसरा नंबरों (88, 89, 102, 143, 231, 262, 1184, 1294, 1292, 1303/1391) की खातेदारी भूमि को लेकर अपील दायर की थी। यह अपील पहले राजस्व अपील प्राधिकारी पाली के समक्ष पेश हुई, जिसे न्यायालय ने 28 अगस्त 2025 को खारिज कर दिया। इसके विरोध में उसी दिन राजस्व मंडल अजमेर में अपील दायर की गई। इसी दौरान, महेंद्र कुमार देवासी ने खुद को फालू बेवा निंबा का गोद पुत्र बताकर म्यूटेशन कराने की कोशिश की। जबकि गोदनामा सिविल न्यायालय में बिना डिक्लेरेशन के पेश किया गया था और वारिस प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया था। यह लगाए आरोप शिकायतकर्ता के अनुसार, 1 सितम्बर 2025 को तत्कालीन तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया गया था कि जब तक गोदनामा सिविल न्यायालय से घोषित न हो और वारिस प्रमाण पत्र पेश न किया जाए, तब तक कोई म्यूटेशन न भरा जाए। इसके बावजूद, 2 सितम्बर 2025 को एपीओ होने और 3 सितम्बर को रिलीव होने के बाद भी, शाम 5 बजकर 12 मिनट पर विवादित म्यूटेशन भर दिया गया। पीड़ित परिवार की मांग
