प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में लाश का इलाज करने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मरीज के परिवार का आरोप है कि बुखार से बच्ची के पीड़ित होने पर उसे कौशांबी से लाकर प्रयागराज के सिविल लाइंस में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर के स्थान पर कंपाउंडर इलाज करते रहे। बच्ची की मौत के बाद भी उसे वेंटिलेटर पर रख कर डॉक्टर अस्पताल का बिल बढ़ाते रहे। कौशाम्बी जिले के देवखरपुर, मंझनपुर थाना क्षेत्र के दिनेश अग्रहरी ने बुखार से पीड़ित अपनी बच्ची का इलाज के लिए रात 11 बजे प्रयागराज के चिल्ड्रन अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजन बच्ची को सिविल लाइंस स्थित आरोग्यम अस्पताल लेकर गए, जहां उसे भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने पहले 40 हजार रुपये जमा कराए। इलाज के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और कंपाउंडर ही इलाज करते रहे। इस बीच रात करीब 3 बजे बच्ची की मौत हो गई। मौत के बावजूद अस्पताल की ओर से लगातार दवाएं मंगवाई जाती रही लेकिन हमें जानकारी नही दी गयी। परिजनों का आरोप है कि जब सुबह 11 बजे उन्होंने बच्ची को रेफर करने की बात कही, तो उन्हें बताया गया कि बच्ची की मृत्यु हो चुकी है। परिजनों ने जब मौत की बात सुनी तो हंगामा करने लगे तो अस्पताल द्वारा 25 हजार पैसे देने का लालच दिया गया। परिजनों ने बताया की इस दौरान अस्पताल ने कुल 62 हजार का बिल बनाया था जिसके बाद उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 25 हजार वापस करने की बात कही। वहीं परिवार वालों का आरोप है की बच्ची के इलाज के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया अस्पताल के कंपाउंडर इलाज करते रहे यहां तक की बच्ची के मरने के बाद भी दो बार दवा मंगवाए।
