15 तारीख पुलिस के लिए चुनौती: हथियार बैन-बाजारों में दहशत:पांच शहरों में 30 चेकिंग नाका, सोशल मीडिया से 500 पोस्ट कराईं डिलीट, चार हजार जवान तैनात

ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर मूर्ति विवाद ने खतरनाक रूप ले लिया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक दूसरे को देख लेने और सबक सिखाने के चैलेंज को रोकना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। 15 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर ग्वालियर में टकराव का दिन माना जा रहा है। इसी तरह की स्थिति 2 अप्रैल 2018 को ग्वालियर में बनी थी तब 3 लोगों की जान गई थी और 9 दिन कर्फ्यू लगा था। पर इस बार जिला प्रशासन, पुलिस पूरी तरह सतर्क है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी में 30 से ज्यादा चेकिंग नाका बनाए गए हैं। अकेले ग्वालियर में 36 नाकाबंदी पॉइंट बनाए गए हैं जिनमें से 17 शहर और 19 पाइंट देहात में रखे गए हैं। यहां चार हजार से ज्यादा जवान व पुलिस अफसर तैनात रहेंगे। 15 तारीख को लेकर शहर के बाजारों में भी दहशत का माहौल है। सोमवार की दोपहर जब दैनिक भास्कर ने शहर के बाजारों में पहुंचकर हाल जाना तो पता लगा कि व्यापारी भी सोशल मीडिया पर 15 तारीख को लेकर असमंजस में हैं। व्यापारियों का कहना है कि वह उस दिन सुबह माहौल देखेंगे और उसके बाद ही अपने प्रतिष्ठान खोलेंगे, क्योंकि साल 2018 के उपद्रव में सबसे ज्यादा नुकसान बाजारों में हुआ था। 500 से ज्यादा पोस्ट सोशल मीडिया से डिलीट कराई गईं
15 अक्टूबर का पूरा मामला सोशल मीडिया की वायरल पोस्ट से पैदा हुआ है। कुछ आईडी से लगातार भड़काऊ पोस्ट की गई। पुलिस 2 दिन में 500 से अधिक पोस्ट डिलीट करा चुकी है। अब जांच की जा रही है कि जिन आईडी से पोस्ट की जा रही है वे सही है या फर्जी। इनके फर्जी होने पर अकाउंट होल्डर पर एफआईआर कराई जाएगी। पुलिस की एक पूरी टीम सोशल मीडिया की हर एक्टिविटी पर नजर रखे हुए है। अस्त्र-शस्त्र लेकर चलने पर रोक
ग्वालियर कलेक्टर व एसएसपी ने 15 तारीख के प्रदर्शन को देखते हुए ऐलान किया है कि 15 तारीख तक अपने साथ शस्त्र लेकर चलना प्रतिबंधित है। किसी भी तरह की धरना, प्रदर्शन, रैली व सभा पर बैन लगा दिया गया है। 15 अक्टूबर को बुधवार रहेगा और स्कूलों में बच्चों को आने जाने को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। जल्द स्कूल वालों को भी इस मामले में कलेक्टर की गाइडलाइन का इंतजार है। होटल-धर्मशालाओं में पुलिस का डेरा
ग्वालियर समेत आसपास के पांच जिले ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना व शिवपुरी में पुलिस ने युद्ध स्तर पर होटल, धर्मशालाओं, आश्रय भवनों पर अपना डेरा जमा लिया है। संबंधित थाना का फोर्स इन जगह पहुंचकर यहां रुकने और आसपास कोई संदिग्ध नजर आने की पूछताछ कर रहे हैं। ट्रेनों से आने जाने वालों पर भी सख्ती से नजर रखी जा रही है। हाइवे ब्लॉक, अंचल के जिलों में पुलिस तैनात
बाहर से जिले का माहौल खराब करने के लिए लोग ना आ सके, इसके लिए सभी हाईवे सील कर दिए हैं और हर आने जाने वाले की पूरी तलाशी के साथ ही उनके आने और जाने की जानकारी एकत्रित की जा रही है। इसके साथ ही अंचल के मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया और शिवपुरी में भी स्थानीय पुलिस को तैनात कर दिया है, ताकि इन जिलों से बाहरी व्यक्ति ग्वालियर में नहीं आने पाए। इन रास्तों से आने वाले बाहरी लोगों से पुलिस कड़ाई से निपटेगी। ताकि ग्वालियर का माहौल ना बिगड़ पाए। चार हजार जवान-अफसर रहेंगे तैनात
सोमवार से पुलिस अफसर और जवानों को उनके पॉइंट पर तैनात कर दिया जाएगा। बाहरी जिलों से आठ सैकड़ा का बल ग्वालियर आ गया है और यह बल पंद्रह अक्टूबर तक जिले के करीब साढ़े तीन हजार जवानों के साथ तैनात किया गया है। जिसमें सुबह छह से शाम छह बजे तक पुलिस जवान और अफसर तैनात रहेंगे। इसके बाद दूसरी शिफ्ट शाम पांच बजे अपने प्वाइंट पर पहुंचेंगे और सुबह छह बजे तक तैनात रहेंगे। यह होंगे खास नाकाबंदी पॉइंट दंगे में नामजद आरोपियों के कराए बाउंड ओवर
2 अप्रैल 2018 में हुए दंगे में शामिल आरोपियों को भी पुलिस ने अपने टारगेट पर रखा है और इनको बाउंड ओवर कराकर साफ बोल दिया है कि अगर थोड़ी सी भी शरारत की तो पुलिस अपनी तैयारी में है। वह जिन्दगी भर पुलिस को याद करते रहेंगे। इसके साथ ही पुलिस ने पैदल मार्च, मोहल्ला बैठक के साथ ही फ्लैगमार्च निकालकर अपनी ताकत दिखा दी है। लगातार सिविल ड्रैस में पुलिस जवानों को उन इलाकों में तैनात कर दिया है, जो इलाके संवेदनशील है।
दावा-कई संगठन ने आंदोलन वापस लिया
बता दें कि जिला प्रशासन ने अपने सोशल मीडिया ग्रुप पर न्यूज अपडेट की है कि जिला प्रशासन, पुलिस और कई सामाजिक संगठन ने आंदोलन से हाथ पीछे खींचने की बात कही है। दलित समाज के आर्मी संगठन से जुड़े रूपेश केन ने प्रशासन को बताया कि हमने पंद्रह अक्टूबर को आयोजित आंदोलन वापस ले लिया है। ना कोई पोस्ट डाली जाएगी, ना ही कोई आंदोलन किया जाएगा। इसका लिखित पुलिस और प्रशासन को सौंप दिया है। प्रशासन और पुलिस ने यह आश्वासन दिया है कि जो भी एफआईआर हुई है, उसमें एससी-एसटी एक्ट को जोड़ दिया जाएगा। व्यापारी बोले-बाजार में दहशत तो है
इस मामले में मुरार सदर बाजार के व्यापारी लक्ष्मी मेडिकल के संचालक अजय गुप्ता ने बताया कि बाजार में 15 तारीख को लेकर दहशत तो है, क्योंकि 02 अप्रैल 2018 में सबसे ज्यादा नुकसान मुरार के बाजारों में ही हुआ था। हम खुद सोच रहे हैं कि उस दिन दुकान खोलें या नहीं। उस दिन के माहौल को देखने के बाद निर्णय लेंगे। प्रशासन सख्ती बरते- हम तो दुकान खोलेंगे
सराफा व्यापारी सदर बाजार नरेश जैन ने बताया कि हमें जरा भी डर नहीं है। प्रशासन और पुलिस सख्त है, जो लोग आंदोलन की चेतावनी देकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है उस पर प्रशासन को सख्ती बरतनी चाहिए। हम अपनी दुकान उस दिन खोलेंगे। एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिले की शांति से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी माहौल खराब करने का प्रयास करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस सतर्क है और पुलिस जवान और अफसर हर स्थिति पर नजर रखे हुए है। लगातार फ्लैगमार्च निकाला जा रहा है।

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