करनाल के घरौंडा अनाज मंडी में बरसाती सीजन की पहली बारिश ने ही करोड़ों की लागत से किए गए विकास कार्यों की पोल खोल दी। करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च कर मंडी को आदर्श बनाने का दावा किया गया था, लेकिन बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था न होने से मंडी की सड़कें और प्लेटफार्म तालाब में बदल गए।
सड़क का लेवल सही न होना और ड्रेनेज सिस्टम का अभाव किसानों और आढ़तियों के लिए मुसीबत बन गया है। कई बार शिकायतों के बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ। जलभराव से कारोबार प्रभावित होने के साथ-साथ अनाज को भी नुकसान का खतरा बढ़ गया है, जिससे मंडी में चिंता का माहौल है। हर साल शिकायत, फिर भी स्थिति वही
मंडी में सड़क का लेवल और पानी की निकासी को लेकर आढ़तियों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। मार्केटिंग बोर्ड के दफ्तर से लेकर मंडी की सभी सड़कों पर हर बरसात में पानी भर जाता है। आढ़तियों का कहना है कि बरसाती पानी से कारोबार बाधित होता है और अनाज भी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। कहां और कितना खर्च हुआ
मार्केटिंग बोर्ड ने मंडी के तीन शेड की मरम्मत पर 40 लाख रुपये, प्लेटफार्म बनाने पर 90 लाख रुपये और कंक्रीट सड़कों के निर्माण पर 3 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए हैं। इसके बावजूद जलभराव की समस्या का हल नहीं हुआ। विभाग के एसडीओ सुनील भास्कर ने बताया कि शेड, प्लेटफार्म और सड़कों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
पानी की निकासी को लेकर आढ़तियों की शिकायत पर नेशनल हाइवे के अधिकारियों से बातचीत चल रही है, ताकि बरसात का पानी मंडी से बाहर निकाला जा सके। फिलहाल पानी बूस्टर के जरिए निकाला जाता है, जिसमें करीब एक घंटा लगता है। धान सीजन में बढ़ेगी दिक्कत
मंडी में धान का सीजन शुरू हो चुका है और आने वाले महीनों में आवक में तेजी आने वाली है। इस दौरान जलभराव किसानों और उनकी फसलों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। आढ़ती और किसान दोनों ही चिंतित हैं कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खरीदी प्रक्रिया और मंडी का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
