2008 में राजा मानसिंह विवि की स्थापना, बेरुखी ऐसी कि आज भी छात्रों की पढ़ाई अतिथि और विवि का काम ठेके पर पूरे 17 साल बीत गए। राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की स्थापना 2008 में हुई। तब से ही यहां पांच कुलपति और सात रजिस्ट्रार बदल गए। खूब सारे कोर्स भी शुरू हुए। विवि में ही 700 बच्चे पढ़ रहे। 138 कॉलेज यहां से जुड़े हैं। यानी इनके12 हजार बच्चे इसी विवि के जिम्मे हैं। इसके बावजूद विवि पूरी तरह डेप्युटेशन पर चल रहा है। आज तक यानी 17 साल में सेटअप तक स्वीकृत नहीं हो पाया। अभी विवि में सिर्फ 5 कर्मचारी हैं और पांच शिक्षक। कैसे होती होगी संगीत और कला की पढ़ाई। सबसे बड़ी बात ये कि 15 साल पहले खुले इसी तरह के विशिष्ट यानी विषय विशेष के तहत विश्वविद्यालयों की स्थिति भी ऐसी ही है। यानी वोटनीति के लिए विश्वविद्यालय तो सरकार ने खोले लेकिन शिक्षक और बाकी कर्मचारी रखे जाने की मंजूरी तक नहीं दी गई। अब पूरी शिक्षा आउटसोर्स यानी ठेके पर है। बाकी अतिथि शिक्षकों के भरोसे। उज्जैन के संस्कृत और वैदिक शिक्षा विश्विवद्यालय, भोपाल के हिंदी विश्वविद्यालय भी सरकार की प्राथमिकता में नहीं आ पाए। हालांकि सांची में बौद्ध विश्वविद्यालय और महू में आंबेडकर विश्वविद्यालय पर सरकार की खासी इनायत रही। 5 स्थायी, 30 आउटसोर्स पर टिका पूरा सिस्टम फिलहाल इस बड़े विवि में मात्र 5 नियमित कर्मचारी और 30 आउटसोर्स स्टाफ पूरे प्रशासनिक व शैक्षणिक कामकाज को संभाल रहे हैं। मंजूरी न मिलने से विश्वविद्यालय का संचालन वर्षों से अस्थायी इंतजामों पर टिका हुआ है। संगीत विवि: रोटेशन प्रक्रिया में उलझी भर्ती
प्रदेश में 138 कॉलेज विवि से संबद्ध हैं। जिनमें 12000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं हैं। अध्ययनशाला में करीब 700 स्टूडेंट्स हैं और पढ़ाने के लिए सिर्फ 7 शिक्षक। हालांकि शिक्षकों की भर्ती के लिए 20 पदों की मंजूरी मिली है, लेकिन भर्ती रोटेशन प्रक्रिया में अटकी हुई है। विवि रजिस्ट्रार भी दूसरे विभाग के हैं, परीक्षा नियंत्रक से अन्य पदों पर जो भी अधिकारी बैठें सब प्रभार पर रखे गए हैं। जिनपर जिम्मेदार वे बोले- जल्द हालात सुधरेंगे शिक्षकों से ही प्रशासनिक काम भी करा रहे
^संगीत विवि में हमारे पास नियमित स्टाफ कम है। इस समस्या को लेकर विभाग में बात हो गई है। हालांकि स्टाफ कम होने के बाद भी हमने संगीत की शिक्षा पर कोई फर्क नहीं पड़ने दिया है। शिक्षकों से ही बांटकर प्रशासनिक काम भी करवा रहे हैं। मैं खुद भी क्लास लेती हूं।
-प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे, कुलगुरू, संगीत विश्वविद्यालय
संगीत विवि के लिए जल्द ही मंजूर होंगे पद
^संगीत विश्वविद्यालय के लिए सेटअप का प्रस्ताव आ चुका है। यह अभी प्रोसेस में है और सभी अनुमतियां जरूरी होती है। जल्द ही पदों की मंजूरी हो जाएगी।
-डॉ.शिव शेखर, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग
