लुधियाना में प्राचीन संगला वाला शिवाला मंदिर के महंत नारायण पुरी का देव लोक गमन हो गया। महंत नारायण पुरी आज उसी संगला वाला शिवाला के प्रांगण में दोपहर एक बजे समाधि ले लेंगे। महंत नारायण पुरी ने 44 वर्षों तक संगला वाला शिवाला में मुख्य सेवादार के तौर पर सेवा निभाई। सुबह के समय उनकी पार्थिव देह संगला वाला शिवाला में अंतिम दर्शनों को लिए रखी जाएगी। उन्होंने शनिवार देर रात हीरो हार्ट सेंटर में अंतिम सांस ली थी। महंत नारायण पुरी ने अपने पिता महंत कपूर चंद से दीक्षा ली और 1981 में पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने संगला वाला शिवाला की सेवा की जिम्मेदारी उठाई। तब से लेकर अब तक वो निरंतर संगला वाला शिवाला में सेवा निभाते रहे। मंदिर के प्रबंधन और भक्तों की सुविधाओं का ध्यान वो खुद रखते थे। हालांकि अब उनके बेटे महंत दिनेश पुरी भी मंदिर की सेवा में जुटे हैं। महंत नारायण पुरी के पूर्वजों को हुए थे सबसे पहले स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन संगला वाला शिवाला का इतिहास 500 साल से पुराना है। महंत नारायण पुरी के पूर्वजों को ही इस जगह पर स्वयं भू शिवलिंग के सबसे पहले दर्शन हुए थे। उन्होंने शिवलिंग के पास छोटा सा मंदिर बनवाया। यहां पर जानवर आते थे तो उन्होंने उसके चारों तरफ संगलें लगा दी थी। तभी इसका नाम संगला वाला शिवाला पड़ा था। श्मशान में नहीं शिवाला में ही बनती हैं समाधि महंत नारायण पुरी का अंतिम संस्कार श्मशान घाट में नहीं होगा। उनको अग्नि भेंट नहीं किया जाएगा बल्कि उनकी समाधि बनाई जाएगी। महंत नारायण पुरी के पूर्वजों की समाधि भी संगला वाला शिवाला के प्रांगण में ही बनी हैं। वहीं पर उनकी समाधि भी बनेगी। शिवरात्रि पर शोभायात्रा निकालने के लिए किया प्रेरित लुधियाना में सनातनियों को जागृत करने के लिए महंत नारायण पुरी ने शहर में शिवरात्रि पर शोभायात्रा शुरू करवाई। उनकी अगुवाई में वर्तमान में शहर में शिवरात्रि पर दो बड़ी शोभायात्राएं निकाली जाती हैं जिनका समापन संगला वाला शिवाला में होता है। महंत नारायण पुरी नाम महंत नारायण पुरी पिता महंत कपूर चंद मां वचनी देवी जन्म 17 नवंबर 1952 शिक्षा: एसडीपी प्रचारक स्कूल उच्च शिक्षा: आर्य कॉलेज से ग्रेजुएशन शिवाला की सेवा की जिम्मेदारी: 1981 शिवाला की सेवा में उनकी 12 वीं पीढ़ी है।
