नमस्कार लाल टोपी, काला चश्मा और चेहरे पर मास्क लगाकर वन मंत्री ने जंगल का निरीक्षण कर डाला। लगे हाथ कर्मचारियों की क्लास भी ले ली। जिलाध्यक्षों को लेकर मीटिंग करने गए पूर्व मंत्रीजी की कार पर लौटते वक्त हमला हो गया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पहचान छिपाकर वन मंत्री का जंगल दौरा मंत्रीजी के पास जंगल विभाग है। त्योहार का सीजन है। दुनिया खरीदारी कर रही है। घूम रही है। आनंद ले रही है। मंत्रीजी क्या करें। सांस लेने की फुरसत नहीं। कभी किसी अभियान में जाना है। कहीं फीता काटना है। कहीं जनसुनवाई करनी है। काम के बोझ तले रविवार फुर्र से निकल जाता है। मंत्रीजी का मन हुआ जंगल घूमने का। दौरा करेंगे तो पूरा लवाजमा साथ जाएगा। अफसर पहुंचेंगे। लीक पर चूना डाला जाएगा। रास्ते में कहीं रिबन बंध जाएंगे। मंत्रीजी को तरकीब सूझी। लाल टोपी, काला चश्मा और चेहरे पर मास्क लगाकर निकल पड़े। रणथंभौर में आम पर्यटक की तरह टिकट खरीदा। गाड़ी पर चौकड़ी बांधकर पीछे बैठ गए। अब अपना ही महकमा है। कहीं अव्यवस्थाएं भी दिखी। तो बस भ्रमण तुरंत औचक निरीक्षण में बदल गया। जंगल वाले कर्मचारियों की जमकर क्लास ले ली। लताड़ पिलाई। अब कर्मचारी हर विजिटर को बड़े गौर से देख रहे हैं। 2. इन्फ्लूएंसरों के मेले में मची भगदड़, खाकी वाले खुद क्रिएटर मेला-ठेला में अव्यवस्थाएं होती ही हैं। अगर कोई बड़ी हस्ती मेले में पहुंच जाए तो देखने की होड़ मच जाती है। धक्का-मुक्की भी हो जाती है। लेकिन जयपुर के चौमूं में तो आयोजकों ने हस्तियों का मेला ही लगा लिया। सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले, यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले, कंटेंट क्रिएटर, इन्फ्लूएंसर तमाम लोगों को जुटा लिया। रीलबाजों के बादशाह एल्विश यादव भी पहुंच गए। अब ऐसी मजबूत बल्लियां कहां मिलेंगी जो फैन को अपने चहेते कलाकारों के पास जाने से रोक सकें। जनता के सब्र का बांध टूट गया। बैरिकेडिंग फलांग गए। भगदड़ सी मच गई। इन्फ्लूएंसरों की जान हलक में अटक गई। पुलिस चेती। बल प्रयोग किया। SHO साहब ने सफाई में कहा कि सेलिब्रिटी आते हैं तो भीड़ जुट ही जाती है। खंगालने पर पता चला कि SHO साहब खुद रीलों के शौकीन हैं। सोशल मीडिया उनकी रीलों से भरा पड़ा है। 3. जालोर में पूर्व मंत्री की गाड़ी पर मारे ‘मुक्के’ संगठन में शक्ति है। राजस्थान में विरोधी पार्टी का संगठन बिखरा हुआ है। यानी शक्ति बिखरी हुई है। इसी शक्ति को समेटने के लिए ‘संगठन सृजन अभियान’ चल रहा है। हालांकि इस अभियान में संगठन को मजबूत करने से ज्यादा जिलाध्यक्षों की नियुक्त पर माथापच्ची की जा रही है। पर्यवेक्षक घूम-घूमकर एक ही बात कह रहे हैं- ताकत दिखाओ। ताकत दिखाओ। जालोर में ऐसी ही एक मीटिंग में दिनभर सिर खपाने के बाद पूर्व मंत्रीजी कार में बैठे और होटल के लिए निकले। रास्ते में उनकी कार ने एक कार को ओवरटेक किया। इतनी सी बात थी। कार सवार ने पूर्व मंत्रीजी की कार के आगे अपना वाहन लगाकर रास्ता रोका। उतरकर ड्राइवर की हजामत बनाई। पूर्व मंत्रीजी की विंडो का शीशा भी मुक्कों से बजा दिया। लोग जुटे तो मुश्किल से जान बची। मंत्रीजी भी सोच रहे होंगे कि कहीं किसी दावेदार को तो ‘ओवरटेक’ नहीं कर गए थे। ऐसा कौन था जिसने बिना संगठन ही ताकत दिखा दी। 4. चलते-चलते… पान सिंह जी ने एक फिल्म में कहा था-बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में। लेकिन चंबल के बीहड़ों से मगरमच्छ भी निकलते हैं। हालांकि ये वो मगरमच्छ नहीं हैं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्रीजी ने पेपरलीक के खिलाफ चल रही कार्रवाई के संदर्भ में कहा था। न ही ये वो मगरमच्छ हैं जो जन सहानुभूति अथवा टिकट के लिए आंसू बहाते हैं। यह वाकई एक मगरमच्छ था और चंबल से निकलकर सचमुच ही कोटा शहर की एक कॉलोनी में एक कोठरी में जाकर छिप गया था। वह दीवार से लगकर उसी तरह जान की खैर मना रहा था, जिस भांति इन दिनों डमी कैंडिडेट मना रहे हैं। जनता को जब मगरमच्छ की सूचना मिली तो टाइगर को बुलाया। टाइगर न तो सवाई माधोपुर के जंगल से आया था और न ही मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट से। ये टाइगर महोदय वन्यजीव प्रेमी हयात खान टाइगर थे। जिन्हें मगरमच्छ पकड़ने का अनुभव है। वे कोठरी में घुसे। मगरमच्छ के साथ जंग हुई। बाहर पूरे मोहल्ले की सांस ऊपर-नीचे हो रही थी। और फिर टाइगर जी मगरमच्छ को उसी तरह कंधे पर लेकर बाहर निकले जिस तरह सदी के महानायक गंगा जमुना सरस्वती में खलनायक का अंत करने निकले थे। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
