फर्रुखाबाद में ससुरालियों के सामने चौकी में बंद कर पीटने के आरोप में जेल गए दो सिपाहियों की जमानत मंजूर कर ली गई है। अदालत ने दोनों सिपाहियों को एक-एक लाख रुपए के निजी बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामला मऊदरवाजा थाने के गांव छेदा नगला का है। यहां के निवासी पूर्व बीडीसी रामरहीस राजपूत के 25 वर्षीय पुत्र दिलीप ने 14 जुलाई की रात घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। दिलीप ने अपनी पैंट पर सुसाइड नोट लिखा था। इस नोट में उसने हथियापुर चौकी के सिपाही यशवंत सिंह और महेश उपाध्याय पर ससुरालियों के सामने पीटने और 40 हजार रुपए लेकर छोड़ने का आरोप लगाया था। मृतक के पिता की शिकायत पर दोनों सिपाहियों के साथ-साथ नेता रजनेश राजपूत, मृतक के ससुर और साले के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शुक्रवार को सिपाही यशवन्त सिंह और महेश उपाध्याय के अधिवक्ता ने कोर्ट में जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल किया। जज नीरज कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रार्थनापत्र का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने दोनों सिपाहियों को एक-एक लाख रुपए के दो निजी बंधपत्र पर जमानत प्रदान कर दी। अब दोनों सिपाहियों के जेल से बाहर आना तय है। इस मामले में शामिल अन्य तीन आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं।
