बीकानेर| रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में चातुर्मासिक प्रवचन में सोमवार को गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर ने कहा कि मानव को अपने शरीर से परेशानी की बजाए अपने कर्मों से पीड़ा, तकलीफ व परेशानी होती है। जीवात्मा ने जो कर्म बांधे है उनको भोगना पड़ेगा। परमात्मा के स्मरण, दर्शन व वंदन करने से कर्मों को समता भाव से सहन करने की शक्ति मिलती है। समता के बिना दुःख, कष्ट व असताना के कारण नये कर्मों का बंधन होता है। गणिवर्य ने कहा कि पुण्यानु बंधी पूण्य का उदय पापानुबंधी पुण्य की तुलना में बहुत ही उच्च कोटि की सामग्री देता है और आत्मा को संबल प्रदान करता है।
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