चित्रकूट ट्रेजरी में लगभग 75 करोड़ रुपए के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। जांच के दौरान पता चला है कि सरकारी धन का लेनदेन 95 फर्जी खातों के माध्यम से गुप्त रूप से किया जा रहा था। इस मामले में जांच अभी जारी है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, विभाग में अब तक 75 से 80 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिले के वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि जांच चल रही है और वे अभी इस संबंध में अधिक जानकारी देने की स्थिति में नहीं हैं। यह फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब खड़ेंहा निवासी मृतक आश्रित शिक्षक राजबहादुर की पत्नी कमला देवी की पेंशन रुक गई। शिकायत लेकर ट्रेजरी पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके खाते में लगभग 31 लाख रुपए आए थे। कमला देवी के अनुसार, यह धन उनके भाई ओमप्रकाश के प्रयासों से आया था। कमला देवी ने बताया कि उनकी पेंशन छह महीने से रुकी हुई थी। जब उन्होंने संबंधित विभाग से शिकायत की, तो पता चला कि ओमप्रकाश ने जमा धनराशि निकाल ली है। पीड़िता कमला देवी ने तहरीर देकर आरोप लगाया है कि उनके भाई ने कई सेवानिवृत्त शिक्षकों और उनकी पत्नियों के खातों में पैसे डलवाकर निकाले हैं। सूत्रों के अनुसार, घोटाले के तार काफी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। इसी संबंध में मऊ तहसील के नेउरा गांव निवासी जगतराम तिवारी ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओमप्रकाश पटेल नामक व्यक्ति ने उनसे कहा था कि उसके कुछ रिश्तेदार इंदौर में प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं और उन्हें किसी खाते की आवश्यकता है। जगतराम ने अपनी पासबुक दी, जिसके बाद उनके खाते में ट्रेजरी से 41 लाख रुपए आए, जिसे ओमप्रकाश ने निकाल लिया। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में ट्रेजरी सिस्टम के कुछ लोगों की संलिप्तता की आशंका है। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने दोहराया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है।
