प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। इसका असर कछारी इलाकों में रहने वालें परिवारों पर पड़ने लगा है। द्रौपती घाट, छोटा बघाड़ा, सलोरी समेत अन्य एक दर्जन से ज्यादा इलाकों में बने हजारों घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे अब इन लोगों को नया ठिकाना बाढ़ राहत शिविर बन गया है। प्रशासन की ओर से 26 राहत शिविर बनाए गए हैं। हालांकि अभी सभी राहत शिविरों को सक्रिय नहीं किया गया है। बघाड़ा इलाके में ऐनी बेसेंट स्कूल में बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित पहुंच गए हैं। इसी तरह कैंट मैरिज हाल को भी शिविर बनाया गया है। यहां भी कई लोग पहुंच गए हैं। इसमें प्रतियोगी छात्र भी शामिल हैं जो दूसरे शहरों से यहां परीक्षाओं की तैयारी करने आए हैं। बच्चों को दूध और इलाज तक की व्यवस्था
कैंट मैरिज हाल के व्यवस्था देख रहे सुलभ तिवारी बताते हैं कि प्रशासन की ओर से यहां पूरी तैयारी की गई है। जो परिवार यहां आ रहे हैं उन्हें रहने और खाने के पूरे इंतजाम किए गए हैं। यदि छोटा बच्चा है तो उसके दूध तक का इंतजाम यहां किया गया है। मेडिकल टीम भी उपलब्ध है, जरूरत पड़ने पर इलाज की व्यवस्था है। जौनपुर के जलालपुर से आए सौरभ यादव बताते हैं कि “जिस कमरे में रहता था उसमें पानी भर जाने की वजह से यहां आया हूं। आगे कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं हैं इसलिए घर नहीं गया और यहीं पर पढ़ाई कर रहा हूं। यहां पर कोई असुविधा नहीं है।” शिवजीत बताते हैं “पानी ज्यादा आने से रास्ते में भी पानी आ गया था इससे कमरे तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। जानकारी मिलने पर यहां शिविर में रहकर पढ़ाई चल रही है।” डेंजर लेवल से महज एक मीटर तक पहुंचीं गंगा
गंगा डेंजर लेवल से महज एक मीटर नीचे तक पहुंच गई हैं। यहां बाढ़ का डेंजर लेवल 84.734 मीटर है जबकि गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 83.08 मीटर पहुंच गया है। छतनाग में 82.41 मीटर है। बताया जा रहा है कि अभी 6 लाख क्यूसेक पानी और आ रहा है। यदि बारिश भी होती रही तो जल्द ही जलस्तर में और वृद्धि देखी जाएगी। संगम से लेकर दारागंज समेत सभी घाट जलमग्न हो गए हैं। नावों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया है। दारागंज और रसूलाबाद घाट पर अंत्येष्टि स्थल पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। यहां सड़क पर अंत्येष्टि की जा रही है।
