नालंदा के चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज में एक स्टूडेंट की रहस्यमय मौत हो गई। इसके बाद भड़की हिंसा के मामले में पुलिस प्रशासन ने 30 नामजद व्यक्तियों सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। बुधवार की रात गर्ल्स हॉस्टल की छत से गिरकर सोनम नाम की छात्रा की मौत के बाद हुई इस हिंसा में कॉलेज परिसर को भारी नुकसान हुआ है। इस मामले में तीन अलग-अलग दिशाओं से कानूनी कार्रवाई देखने को मिली है। मृतक छात्रा के पिता ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है, जबकि कॉलेज प्रबंधन ने भी तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में एफआईआर के लिए आवेदन दिया है। थानाध्यक्ष सुमन कुमार के अनुसार, “सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की गई है और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास चल रहे हैं।” उन्होंने बताया कि मृतक के पिता ने अपने आवेदन में कॉलेज प्रशासन की लापरवाही को स्टूडेंट की मौत का कारण बताया है। शुक्रवार को भी लैब से धुआं निकला घटना के दो दिन बाद भी चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज में तबाही के निशान दिखे हैं। शुक्रवार को भी लैब से धुआं निकल रहा था, जो बुधवार की रात हुई आगजनी की गंभीरता को दर्शाता है। हॉस्टल पूरी तरह खाली हो चुका है और छात्र गुरुवार को ही अपना सामान लेकर चले गए थे। हिंसा में भारी नुकसान हुआ है। “2015 से 2025 तक के सभी रजिस्टर, रिकॉर्ड बुक, कैश बुक, वाउचर नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा 6 टेलीविजन, 11 एयर कंडीशनर, 6 सोफा सेट, 2 फ्रिज, 3 वाटर कूलर, 7 प्रिंटर, दर्जनों कंप्यूटर और 24 बायोमैट्रिक्स मशीनें बर्बाद हो गईं। प्रिंसिपल चैंबर, ऑफिस और इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स लैब को आग के हवाले कर दिया गया था। प्रिंसिपल गोपाल नंदन ने बताया कि नष्ट हुई संपत्ति का आकलन किया जा रहा है। अस्पताल में भी हुआ उपद्रव कॉलेज परिसर में हुई तोड़फोड़ के बाद उग्र छात्रों ने अस्पताल में भी हंगामा किया था। वहां पुलिस अधिकारी की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और एक स्कूटी को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। सोनम की मौत का रहस्य अभी भी अनसुलझा इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सोनम की मौत कैसे और क्यों हुई। कॉलेज परिसर और स्थानीय क्षेत्र में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरी थी। परिजनों का दावा है कि स्टूडेंट ने उन्हें फोन कर बताया था कि दो अन्य छात्राओं से उसका विवाद हुआ था और वे उसे परेशान कर रही थीं व अंजाम भुगतने की धमकी दे रही थीं। हंगामा करने वाले छात्रों ने हेड मास्टर पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि छात्रों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि घायल छात्रा को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं की गई। एम्बुलेंस पहुंचने में आधे घंटे का समय लगा, जिसके दौरान छात्रा वहीं तड़पती रही। प्रिंसिपल गोपाल नंदन ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि “रात 8.41 बजे छात्रा छत से गिरी थी। 8.55 बजे सीसीटीवी फुटेज देखकर मैं अपनी गाड़ी लेकर उसे अस्पताल ले जाने पहुंचा था, तभी एम्बुलेंस आ गई। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए मुझे वहां से हटना पड़ा।
