नवादा के सदर अस्पताल में रविवार को बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंकते हुए 9 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। संघ की अध्यक्ष सावित्री देवी ने बताया कि सरकार द्वारा दिए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। वादाखिलाफी से नाराज हैं आशा कार्यकर्ता सावित्री देवी ने कहा, “हमने पिछली बार आंदोलन किया था, तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाएगा और मानदेय में वृद्धि की जाएगी। लेकिन आज तक न मानदेय बढ़ा और न ही दर्जा मिला। अब हमने फैसला किया है कि इस बार आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक होगा।” 9 जुलाई से ठप रहेगा स्वास्थ्य सेवाओं का काम आशा संघ ने स्पष्ट किया है कि 9 जुलाई से पूरे जिले की करीब 3000 आशा कार्यकर्ता कार्य का बहिष्कार करेंगी। इससे स्वास्थ्य विभाग के कई जरूरी कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं आदि शामिल हैं। ये हैं प्रमुख मांगे: आंदोलन की व्यापक तैयारी बैठक में तय हुआ कि संघ के प्रतिनिधि हर प्रखंड में जाकर आशा कार्यकर्ताओं को एकजुट करेंगे और हड़ताल को सफल बनाएंगे। सभी आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क कर आंदोलन की रूपरेखा साझा की जा रही है। सरकार को अंतिम चेतावनी संघ ने राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे संगठित और एकजुट हैं, और इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
